Dhanteras 2018

धनतेरस क्या है ?

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक धनतेरस दिवाली दो दिन पहले मनाया जाता है. धन का मतलब समृद्धि और तेरस का मतलब तेरहवां दिन होता है. धन को तेरह गुणा बनाने और उसमें वृद्धि करने का द‌िन है धनतेरस

After long wait for 45 Years, This Dhanteras is special; prosperity will touch your feet.
Kuber 

45 वर्ष बाद इस धनतेरस पर विशेष संयोग, आएगी अधिक समृद्धि. 45 वर्ष बाद इस धनतेरस पर विशेष संयोग बन रहा है। इस बार धनतेरस पार धन लक्ष्मी योग, श्री वृद्धि योग तथा श्री वत्स योग एक साथ पड़ रहे हैं। धनतेरस पर इस बार कलानिधि योग बन रहा है। यह योग 45 वर्ष बाद धनतेरस पर आ रहा है। इस योग ने धनतेरस को और अधिक विशेष बना दिया है। इस दिन खरीदारी करने से और अधिक समृद्धि आएगी।  5 नवंबर(November) को धनतेरस का पर्व है। इस बार धनतेरस पार धन लक्ष्मी योग, श्री वृद्धि योग तथा श्री वत्स योग एक साथ पड़ रहे हैं।  तीनों योग के एक साथ होने की वजह से कलानिधि योग बन रहा है। इस योग में लक्ष्मी पूजन और खरीदारी करने से वर्षभर समृद्धि बनी रहती है।

What is the importance of Dhanteras before Diwali?

दिवाली से पहले धनतेरस पर पूजा का विशेष महत्व होता है और इस दिन धन और आरोग्य के लिए भगवान धन्वंतरि पूजे जाते हैं. इस दिन कुबेर की पूजा की जाती है.इसी दिन भगवान धनवन्‍तरी का जन्‍म हुआ था जो कि समुन्‍द्र मंथन के दौरान अपने साथ अमृत का कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे और इसी कारण से भगवान धनवन्‍तरी को औषधी का जनक भी कहा जाता है. धनतेरस के दिन सोने-चांदी के बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है. इस दिन धातु खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से किस्मत चमक जाती है. इस दिन धनतेरस (Dhanteras) के साथ-साथ Dhwantri Jayanti भी मनाई जाती है। धनतेरस पूजा को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है।

कब की जाती है धनतेरस की पूजा( When Dhanteras pooja or worship happens)

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक धनतेरस कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन यानि दिवाली दो दिन पहले मनाया जाता है. धन का मतलब समृद्धि और तेरस का मतलब तेरहवां दिन होता है. धनतेरस यानी अपने धन को तेरह गुणा बनाने और उसमें वृद्धि करने का द‌िन. कारोबारियों के लिए धनतेरस का खास महत्व होता है क्योंकि धारणा है कि इस दिन लक्ष्मी पूजा से समृद्धि, खुशियां और सफलता मिलती है। साथ ही सभी के लिए इस पूजा का खास महत्व होता है।

धनतेरस कब है, और शुभ मुहूर्त ( When is Dhanteras 2018)

5 नवम्बर2018 लक्ष्मीकुबेर पूजा मुहूर्त :

शाम 07:19 से लेकर रात को 08:17 तक पूजा कर सकते है।

प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 05:45 से लेकर रात्रि 08:17 तक है।

कब करें खरीदारी और कब है शुभ मुहूर्त

काल- सुबह 7.33 बजे तक दवा और खाद्यान्न. शुभ- सुबह 9.13 बजे तक वाहन, मशीन, कपड़ा, शेयर और घरेलू सामान. चर- 14.12 बजे तक गाड़ी, गतिमान वस्तु और गैजेट. लाभ- 15.51 बजे तक लाभ कमाने वाली मशीन, औजार, कंप्यूटर और शेयर. अमृत- 17.31 बजे तक जेवर, बर्तन, खिलौना, कपड़ा और स्टेशनरी. काल- 19.11 बजे तक घरेलू सामान, खाद्यान्न और दवा.

धनतेरस में खरीदारी का शुभ मुहूर्त ।

Dhanteras Me Kharidari Ka Subh Muhurat

धनतेरस में बरतन एवं आभूषण खरीदने का शुभ मुहूर्त. Mumbai :- 1 बजकर 46 मिनट से 3 बजकर 10 मिनट Kolkata :- 12 बजकर 43 मिनट से 2 बजकर 5 मिनट तक का समय श्रेष्ठ है।

Delhi, Chennai and Chandigarh :- दोपहर 1 बजकर 28 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक का समय सबसे उत्तम है।

धनतेरस पूजा / पूजन सामग्री (Dhanteras Pujan Samagri)

21 पूरे कमल बीज Ø मणि पत्थर के 5 प्रकार Ø 5 पूरी सुपारी (रजत लक्ष्मी – गणेश के सिक्कों की एक संख्या (10 ग्राम या अधिक) Ø अगरबत्ती, चूड़ी, तुलसी पत्र, पान, चंदन, लौंग, नारियल, सिक्के, काजल, दहीशरीफा. Ø धूप, फूल , चावल , रोली, गंगा जल ( पवित्र जल ), माला, हल्दी, हनी, कपूर इत्यादि

धन तेरस पूजा विधि (Puja Vidhi):

एक लकड़ी के बेंच पर रोली के माध्यम से स्वस्तिक का निशान बनाये। फिर एक मिटटी के दिए को उस बेंच पर रख कर जलाएं। दिए के आस पास तीन बारी गंगा जल का छिडकाव करें। दिए पर रोली का तिलक लगायें। उसके बाद तिलक पर चावल रखें। दिए में थोड़ी चीनी डालें। इसके बाद 1 रुपये का सिक्का दिए में डालें। दिए पर थोड़े फूल चढायें। दिए को प्रणाम करें। परिवार के सदस्यों को तिलक लगायें। अब दिए को अपने घर के गेट के पास रखें। उसे दाहिने तरह रखें और यह सुनिश्चित करें की दिए की लौं दक्षिण दिशा की तरफ हो। इसके बाद यम देव के लिए मिटटी का दिया जलायें और फिर धन्वान्तारी पूजा घर में करें। अपने पूजा घर में भेठ कर धन्वान्तारी मंत्र का 108 बार जाप करें। “ॐ धन धनवंतारये नमः जब आप 108 बारी मंत्र का जाप कर चुके होंगे तब इन पंक्तियों का उच्चारण करें “है धन्वान्तारी देवता में इन पंक्तियों का उच्चारण अपने चरणों में अर्पण करता हूँ। धन्वान्तारी पूजा के बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पंचोपचार पूजा करना अनिवार्य है। भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के लिए मिटटी के दियें जलाएं। धुप जलाकर उनकी पूजा करें। भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के चरणों में फूल चढायें और मिठाई का भोग लगायें।

पूजा के समय इस मंत्र का करें जप( Praise this Mantra):

देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान, दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः 
 पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो, धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः 
 ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि